भारतीय वन्यजीव संस्थान के बारे में

भारतीय वन्यजीव संस्थान के बारे में

1982 में स्थापित भारतीय वन्यजीव संस्थान (भा.व.सं.) एक अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था है। यह संस्थान प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, अकादमिक कार्यक्रम के अलावा वन्यजीव अनुसंधान तथा प्रबंधन में सलाहकारिता प्रदान करता है।

भारतीय वन्यजीव संस्थान का परिसर समस्त भारतवर्ष में जैव विविधता सम्बन्धी मुद्दों पर उच्च स्तर के  अनुसंधान के  लिजये श्रेष्ठतम्  ढाँचागत सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है।

 

नवीनतम घटनायें

हिमालय श्रंखला , जो कि पहाड़ों एवं उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों को जीवन प्रदान करती है, उसको सुरक्षित रखने हेतु जागरुकता प्रदान करने के लिये सन् 2010 से 9 सितम्बर को ‘हिमालय दिवस’ मनाया जाता है। भारतीय वन्यजीव संस्थान इस दिवस को प्रत्येक वर्ष प्रशिक्षण, कार्यशाला, व्याख्यान एवं सेमिनार का आयोजन करके मनाती है। इस वर्ष हिमालय दिवस का विषय वस्तु ‘नदियों की पारिस्थितिकी सेवा’ है। इसलिये भा00सं0 ने सातवाँ हिमालय दिवस पौड़ी जिले के नायार नदी जो कि उत्तराखण्ड में सुनहरी मशीर के संरक्षण के लिये प्रमुख नदी है, के तट पर ‘हिमालयन नदियों की पारिस्थितिकी सेवा’ विषय पर प्रशिक्षण एवं संरक्षण जागरुकता पर कार्यशाला का आयोजन करते हुये मनाया। यह कार्यशाला राष्ट्रीय मिशन के अन्तर्गत हिमालयन पारितन्त्र को जीवन्त रखने हेतु विज्ञान एवं तकनीकी विभाग द्वारा प्रदत्त/पोषित निधि से आयोजित की गयी। यह कार्यशाला राजकीय इण्टर कालेज बिल्कोट,  पौड़ी में आयोजित की गयी थी जिसमें स्कूली छात्रों, वन कर्मियों,  उत्तराखण्ड वन विभाग के कर्मचारी गण एवं नजदीकी क्षेत्रों के मछुआरों सहित 70 लोगों ने भाग लिया। हिमालयन एवं इसकी जैव विविधता के संरक्षण के सन्देश के साथ कार्यशाला का उद्घाटन भा00सं0 के डा0 सत्यकुमार बिल्केट इण्टर कालेज के श्री एच0 केस्तवाल,  मुख्य वन संरक्षक श्री गिरिश कुमार रस्तोगी एवं प्रभागीय वन अधिकारी श्री रमेश चन्दर द्वारा किया गया। हेमवती नन्दन बहुगुणा विश्व विद्यालय पौड़ी परिसर के जुलोजी विभागाध्यक्ष डा0 अनूप डोबरियाल कार्यशाला के मुख्य अतिथि थे। उन्होंन ‘हिमालयन नदियों की पारिस्थितिकी की सेवा’ विषय पर व्याख्यान दिया। नयार नदी के तट पर डा0 के0 शिव कुमार एवं डा0 जानसन द्वारा अभ्यास का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद सभी प्रतिभागियां को समूहों में विभाजित करके नदियों की पारिस्थितिकी गुणवत्ता मूल्यांकन एवं रेस्टोरेशन तकनीक का अभ्यास कराया गया। विभिन्न वैज्ञानिक तकनीकों द्वारा विनाशकारी मत्स्य शिकार के नुकसान को भी बताया गया। प्रशनोत्तरी के माध्यम से प्रतिभावान छात्रों को पुरस्कार प्रदान किया गया। भारतीय वन्यजीव संस्थान के डा0 वी0 पी0 उनियाल द्वारा भविष्य में युवाओं के लिये इस प्रकार के कार्यशाला एवं प्रशिक्षण के आयोजन पर जोर देते हुये समापन भाषण दिया गया। डा0 विनीत दूबे एवं सुश्री आशना शर्मा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।

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