जनसंख्या प्रबंधन कैप्चर तथा पुनर्वास



इस संकाय का उददेश्य मानव-वन्यजीवों के टकराव को कम करना, जनसंख्या प्रबंधन कैप्चर तथा संकटग्रस्त प्रजातियों का पुनर्वास करना, घायल या  फसें हुए पशुओं का बचाव करना है। पशुओं को सुरक्षित पकड़ कर गतिहीन करना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है और इसकी आवश्यकता केवल उनके पुनर्वास में नहीं परन्तु आचरण सम्बन्धी तथा पारिस्थितिकी के अध्ययन में भी पड़ती है । संकाय के सदस्य भारत में सुरक्षित क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की वन्यजीव प्रजातियों पर, जिनमें बाघ, जंगली सुअर, हिमालय में पाया जाने वाला भूरे रंग का भालू, रीछ, मलायन सन भालू आदि हैं, पर पारिस्थितिकी तथा प्रबंधन उन्मुख अनुसंधान कर रहे हैं। इन परियोजनाओं में सदस्यों को प्रबंधकों तथा स्थानीय समुदाय के साथ काम करना पड़ता है ताकि मानव-वन्यजीवों की आपसी समस्याओं का निदान हो सके।

इस संदर्भ में एक प्रशिक्षण कार्यशाला तडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व, चन्द्रपुर महाराष्ट्र में आयोजित की गई । इस प्रशिक्षण कार्यशाला का उददेश्य संकटग्रस्त पशुओं के प्रबंधन के लिये दक्षताओ का निर्माण करना था। क्षेत्र प्रबंधकों के लिये पावर फेंसिंग तकनीकी मैनुअल का विकास भी किया गया।

 

कमर कुरैशी 
वैज्ञानिक - जी
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डॉ रमेश चिंनासामी
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