विरासत प्रबंधन में पाठ्यक्रम

डब्ल्यूआईआई–सी2सी की स्थापना वर्ष 2015 में यूनेस्को विश्व धरोहर सम्मेलन, 1972 के उद्देश्यों को साकार करने के लिए की गई थी। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं सूचना प्रसार के माध्यम से विश्व धरोहर से जुड़े पेशेवरों की क्षमता का विकास करना है।केंद्र ने विश्व धरोहर संरक्षण से संबंधित अनेक विषयगत क्षमता निर्माण एवं जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इनमें आपदा जोखिम न्यूनीकरण, संस्कृति–प्रकृति संबंध, पारिस्थितिकी पर्यटन, न्याय एवं सततता तथा उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्यविश्लेषण शामिल हैं, जिन्हें भारत एवं विदेशों की तकनीकी तथा शैक्षणिक संस्थाओं के सहयोग से संपन्न किया गया है।

विरासत प्रबंधन में पाठ्यक्रम

एसीएसआईआर से संबद्ध यह पाठ्यक्रम अंतर्विषयी प्रकृति का है, जिसमें पारिस्थितिकी विज्ञान और विरासत अध्ययन का सैद्धांतिक एवं कार्यप्रणालीगत एकीकरण शामिल है। विषयगत कार्यशालाएँ तथा विश्व धरोहर स्थलों के साथ क्षेत्रीय सहभागिता इस पाठ्यक्रम की प्रमुख विशेषताएँ होंगी।

मुख्य विशेषताएँ

  • मूलभूत एवं अनुप्रयुक्त विरासत संरक्षण को समाहित करने वाले अध्यापन मॉड्यूल, विषयगत कार्यशालाएँ, वैकल्पिक विषय (इलेक्टिव्स) तथा क्षेत्रकार्य।
  • विरासत संरक्षण के मूल सिद्धांत; जैव विविधता एवं प्राकृतिक विरासत; विरासत के मानवशास्त्रीय एवं पुरातात्विक आयाम; अनुसंधान विधियाँ; विरासत शासन एवं स्थल प्रबंधन; सतत पर्यटन एवं आगंतुक प्रबंधन; विरासत प्रभाव आकलन; तथा विश्व धरोहर आदि विषयों को समाहित करने वाले अध्यापन पाठ्यक्रम।
  • विरासत से जुड़े विभिन्न विमर्शों पर कार्यक्रमों एवं कार्यशालाओं के सह-क्यूरेशन के माध्यम से विद्यार्थियों के कौशल विकास पर विशेष जोर।
  • समग्र अनुसंधान हेतु स्वतंत्र परास्नातक (स्नातकोतर ) शोध-प्रबंध।
  • विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन एवं व्यावसायिक कौशल के विकास पर केंद्रित।