एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र में प्राकृतिक धरोहर संरक्षण को हाल के वर्षों में प्राकृतिक पारितंत्रों पर पड़ रहे अत्यधिक दबाव के कारण अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ये दबाव जनसंख्या के उच्च घनत्व, विनाशकारी आपदाओं के जोखिम, निरंतर आर्थिक वृद्धि तथा लगातार बनी रहने वाली गरीबी का परिणाम हैं। यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र द्वारा एशिया और प्रशांत क्षेत्र में स्थित विश्व धरोहर स्थलों की संरक्षण स्थिति पर किए गए आवधिक प्रतिवेदन के दूसरे चक्र (2012) के परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि विश्व धरोहर संरक्षण और प्रबंधन के लिए क्षमता निर्माण इस क्षेत्र की एक प्रमुख चिंता बना हुआ है। विशेष रूप से, बहुत कम देश ऐसे हैं जिनके पास प्राकृतिक धरोहर के लिए उपयुक्त प्रशिक्षण सुविधाएँ उपलब्ध हैं।उपरोक्त स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने सितंबर 2012 में यूनेस्को के महानिदेशक को एक “कार्यवाही हेतु अनुरोध“ प्रस्तुत किया, जिसके अंतर्गत एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र के लिए प्राकृतिक विश्व धरोहर पर एक उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया। यह केंद्र देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान में स्थापित किया जाना प्रस्तावित था, जो प्राकृतिक संसाधन संरक्षण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित संस्था है, तथा इसे यूनेस्को के तत्वावधान में श्रेणी–2 केंद्र के रूप में स्थापित करने का सुझाव दिया गया।
दिसंबर 2012 में, एक यूनेस्को विशेषज्ञ द्वारा भारत की यात्रा सहित एक व्यवहार्यता अध्ययन किया गया, ताकि एकीकृत व्यापक रणनीति (35 C/22 एवं Corr.) में निर्धारित श्रेणी–2 केंद्रों की आवश्यकताओं के संदर्भ में इस प्रस्ताव का मूल्यांकन किया जा सके। इस अध्ययन ने प्रस्तावित केंद्र की स्थापना की व्यापक संभावनाओं की पुष्टि की, जो क्षेत्र में विद्यमान एक महत्वपूर्ण कमी को पूरा करेगा और भा.व .सं.की असाधारण सुविधाओं तथा दीर्घकालिक अनुभव—जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव भी शामिल है,से लाभान्वित होगा।यूनेस्को के महानिदेशक ने एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र के लिए देहरादून, भारत में विश्व प्राकृतिक धरोहर प्रबंधन और प्रशिक्षण केंद्र की स्थापनाके प्रस्ताव को, यूनेस्को के तत्वावधान में श्रेणी–2 केंद्र के रूप में, स्वीकार किया तथा यह अवलोकन किया कि भा.व .सं.में इस प्रस्तावित केंद्र की स्थापना यूनेस्को, क्षेत्र के सदस्य देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है। यूनेस्को की महासभा ने 19 नवंबर 2013 को पारित संकल्प 37 C/Resolution 47 के माध्यम से इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की।
यूनेस्को ने अपने तत्वावधान में श्रेणी–2 के अंतर्गत 98 अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संस्थानों एवं केंद्रों को नामित किया है। यद्यपि ये संस्थान और केंद्र कानूनी रूप से यूनेस्को संगठन का हिस्सा नहीं हैं, फिर भी महासभा द्वारा अनुमोदित औपचारिक व्यवस्थाओं के माध्यम से ये यूनेस्को से संबद्ध हैं। इनका चयन यूनेस्को की विशेषज्ञता के क्षेत्रों में से किसी एक में उनकी विशेष दक्षता के आधार पर किया गया है। क्षमता निर्माण, ज्ञान साझा करने और अनुसंधान के माध्यम से ये संस्थान सदस्य देशों के हित में यूनेस्को के रणनीतिक कार्यक्रम उद्देश्यों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण और विशिष्ट योगदान प्रदान करते हैं।
इसके अतिरिक्त, यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र ने चीन, नॉर्वे, दक्षिण अफ्रीका, बहरीन, मेक्सिको, इटली, ब्राज़ील और स्पेन में ऐसे 8 केंद्र स्थापित किए हैं। भा. व .सं में स्थित यह केंद्रप्राकृतिक विश्व धरोहरसे संबंधित विश्व का पहला केंद्र है।
मिशन
इस केंद्र का मिशन एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र में विश्व धरोहर अभिसमय के प्रभावी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करना है। इसके अंतर्गत एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र में प्राकृतिक विश्व धरोहर स्थलों के नामांकन, संरक्षण, सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े सभी पेशेवरों और संस्थाओं की क्षमता का विकास करना शामिल है। यह लक्ष्य प्रशिक्षण, अनुसंधान, सूचना के प्रसार तथा नेटवर्क निर्माण के माध्यम से प्राप्त किया जाता है।
उद्देश्य
- क्षेत्र में प्राकृतिक विश्व धरोहर के प्रबंधन हेतु क्षमताओं के सुदृढ़ीकरण में योगदान देना।
- विश्व धरोहर सूची में एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र की संपत्तियों का अधिक संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने में योगदान देना।
- सामान्य जनमानस, विशेषकर युवाओं, में प्राकृतिक विश्व धरोहर के महत्व तथा उसके संरक्षण की आवश्यकता के प्रति जागरूकता बढ़ाना ।
- राकृतिक विश्व धरोहर से जुड़ी पहलों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
कार्य
- अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक क्षमता निर्माण गतिविधियाँ संचालित करना, जिनमें कार्यशालाएँ, पाठ्यक्रम तथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शामिल हैं।
- प्राकृतिक विश्व धरोहर के संरक्षण और प्रबंधन से संबंधित चिन्हित प्राथमिकता क्षेत्रों पर अनुसंधान करना, विशेष रूप से समुदाय की भागीदारी के मॉडलों पर ध्यान केंद्रित करते हुए।
- क्षेत्र से संबंधित प्राकृतिक विश्व धरोहर मुद्दों पर जनसाधारण के लिए सुलभ एक प्रलेखन केंद्र का विकास एवं रखरखाव करना।
- अन्य क्षेत्रीय संसाधन केंद्रों के साथ विशेषज्ञों के आदान–प्रदान हेतु कार्यक्रमों का कार्यान्वयन करना तथा विश्व धरोहर स्थल प्रबंधकों के एक क्षेत्रीय नेटवर्क के विकास को सुगम बनाना, और इसकी गतिविधियों का समन्वय यूनेस्को विश्व धरोहर अभिसमय के राज्य पक्षों विश्व धरोहर केंद्र, 1972 अभिसमय के सलाहकार निकायों तथा विश्व धरोहर से संबंधित मौजूदा श्रेणी–2 केंद्रों के नेटवर्क के साथ करना।