नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग सुविधा का उद्घाटन की तस्वीर
नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग सुविधा का उद्घाटन

शेरों (पेंथेरा लिओपर्सिका) एवं बाघों (पेंथेरा टाईग्रिस) के मल (स्कैट) नमूनों से डीएनए प्रवर्धनहेतु प्रोटोकॉल का मानकीकरण किया गया तथा 13 माइक्रो-सैटेलाइट लोकी का प्रवर्धन किया गया। अध्ययन का यह घटक—संरक्षण आनुवंशिकी प्रयोगशाला—गिर के शेरों में आनुवंशिक विविधता को समझने तथा मध्य भारत के बाघों में मेटा-जनसंख्या संरचना और जनसंख्या आनुवंशिकी का अध्ययन करने का उद्देश्य रखता है।

संरक्षण आनुवंशिकी प्रयोगशाला की तस्वीर

कान्हा टाइगर रिज़र्व से व्यापक स्तर पर मल (स्कैट) संग्रह भी किया गया है, ताकि बहुरूपी माइक्रो-सैटेलाइट लोकी के माध्यम से जनसंख्या आकलन किया जा सके और उसकी तुलना कैमरा ट्रैप आँकड़ों से प्राप्त मार्क-रीकैप्चर अनुमानों से की जा सके। पकड़े गए बाघों (टेलीमेट्री अध्ययन हेतु) से प्राप्त डीएनए आँकड़ों का उपयोग रिश्तेदारी निर्धारण तथा मल-आधारित डीएनए विश्लेषण से संबंधित त्रुटियों के आकलन के लिए किया जा रहा है।