भारतीय वन्यजीव संस्थान (वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया) प्राकृतिक विरासत संरक्षणपर एक विशेषीकृत पाठ्यक्रम प्रदान करता है, जिसका उद्देश्य भारत की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत के समेकित प्रबंधन में क्षमता निर्माण करना है। पारिस्थितिक तंत्रों और सांस्कृतिक परिदृश्यों के परस्पर आश्रित संबंध को ध्यान में रखते हुए, यह कार्यक्रम मुख्य रूप से भारतीय वन्यजीव संस्थान की विश्व धरोहर प्रकोष्ठ के माध्यम से संचालित किया जाता है, जो यूनेस्को तथा भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ निकट सहयोग में कार्य करता है।

विरासत संरक्षण पर अंतर्राष्ट्रीय पाठ्यक्रम

पाठ्यक्रम अवलोकन

प्राकृतिक विरासत संरक्षण पर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमएक अल्पकालिक व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसे भारत में प्राकृतिक विश्व धरोहर स्थलों तथा अन्य विरासत-समृद्ध परिदृश्यों के संरक्षण हेतु आवश्यक ज्ञान और कौशल से प्रतिभागियों को सुसज्जित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

उद्देश्य

  • यूनेस्को दिशानिर्देशों के अंतर्गतविश्व धरोहरकी अवधारणा तथाप्राकृतिक विरासत सूचीकरण के मानदंडोंकी समझ विकसित करना।
  • प्राकृतिक विरासत स्थलों मेंपारिस्थितिक निगरानी, स्थल प्रबंधन योजनातथासमुदाय सहभागितासे संबंधित तकनीकी क्षमता का निर्माण करना।
  • विरासत प्रलेखन, जोखिम आकलनतथा विरासत मानचित्रण हेतुभू-स्थानिक (जियोस्पेशल) उपकरणोंके उपयोग में कौशल विकसित करना।
  • संरक्षण रणनीतियों मेंसांस्कृतिक एवं प्राकृतिक मूल्यों के एकीकरणको प्रोत्साहित करना।

लक्षित कर्मचारी

  • वन अधिकारी एवं संरक्षित क्षेत्र प्रबंधक
  • संरक्षण क्षेत्र में कार्यरत पेशेवर तथा गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े कर्मी
  • शिक्षाविद्, विरासत पेशेवर एवं वास्तुकार
  • विरासत संरक्षण में रुचि रखने वाले स्नातकोत्तर छात्र एवं शोधकर्ता

पाठ्यक्रम सामग्री

  • प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत के सिद्धांत
  • यूनेस्को विश्व धरोहर अभिसमय: प्रक्रियाएँ एवं दिशानिर्देश
  • जैव विविधता तथा परिदृश्य संरक्षण
  • सामुदायिक सहभागिता एवं सतत पर्यटन
  • विरासत स्थलों का भू-सूचना विज्ञान (जियोइन्फॉर्मेटिक्स) एवं मानचित्रण
  • भारतीय विश्व धरोहर स्थलों से केस अध्ययन (जैसे—पश्चिमी घाट, काजीरंगा, केवलादेव तथा नंदा देवी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र)

अवधि एवं प्रारूप

यह पाठ्यक्रम सामान्यत : 2 से 4 सप्ताहकी अवधि का होता है औरदेहरादून स्थित भा.व सं परिसरमें आयोजित किया जाता है।

इसमेंकक्षा व्याख्यान, समूह कार्य, व्यावहारिकसत्रतथा संबंधितविरासत स्थलों के क्षेत्रीय भ्रमणशामिल होते हैं।

भा.व सं यूनेस्को, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षणतथा अन्य संस्थानों केप्रख्यात विशेषज्ञइस पाठ्यक्रम में संकाय के रूप में योगदान देते हैं।

प्रमाणीकरण एवं प्रभाव

पाठ्यक्रम की सफलतापूर्वक पूर्णता पर प्रतिभागियों को भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है, जिससे वे विश्व धरोहर स्थलों तथा उत्कृष्ट सार्वभौमिक महत्व वाले प्राकृतिक परिदृश्यों के प्रबंधन एवं संरक्षण के लिए अधिक सक्षम हो जाते हैं। इस पाठ्यक्रम ने स्थल प्रबंधकों की क्षमता वृद्धि करने तथा भारत में विरासत संरक्षण के लिए अंतर्विषयी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

संक्षेप में, भारतीय वन्यजीव संस्थान में संचालित यह विरासत संरक्षण पाठ्यक्रम जैव विविधता संरक्षण और सांस्कृतिक संरक्षण के बीच सेतु का कार्य करता है, जिससे पूरे भारत में समग्र एवं सतत विरासत प्रबंधन को सुदृढ़ समर्थन मिलता है।