सैकॉन की स्थापना ऐसे समय में हुई, जब प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और संरक्षण—ये दोनों मुद्दे वैश्विक एजेंडे में प्रमुख रूप से शामिल थे। पक्षी अध्ययन और संरक्षण में समग्र दृष्टिकोण की अनिवार्यता को समझते हुए, सैकॉन के प्रमुख उद्देश्यों की परिकल्पना इस प्रकार की गई कि उसके केंद्र में पक्षीविज्ञान (ऑर्निथोलॉजी) हो, साथ ही संपूर्ण प्राकृतिक इतिहास को भी समाहित किया जाए।

सैकोन बिल्डिंग

सैकॉन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं —

  • जैव विविधता और प्राकृतिक इतिहास के सभी पहलुओं को समाहित करते हुए पक्षीविज्ञान में अनुसंधान की रूपरेखा तैयार करना और उसका संचालन करना।
  • पक्षीविज्ञान और प्राकृतिक इतिहास में एम् एस सी ., एम् .फिल औरपी एच डी के लिए नियमित पाठ्यक्रम तथा इन विषयों में अल्पकालिक अभिमुखीकरण पाठ्यक्रम विकसित करना और संचालित करना।
  • भारतीय पक्षीविज्ञान और प्राकृतिक इतिहास पर एक डाटा बैंक तैयार करना।
  • समुदाय के लाभ के लिए पक्षीविज्ञान और प्राकृतिक इतिहास से संबंधित ज्ञान का प्रसार करना।
  • पक्षीविज्ञान और प्राकृतिक इतिहास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवाएँ प्रदान करने वाले व्यक्तियों को मानद उपाधियाँ, पुरस्कार एवं अन्य सम्मान प्रदान करना।

1980 के दशक में, भारतीय पक्षीविज्ञान के जनक कहे जाने वालेसलीम अलीने एक ऐसे राष्ट्रीय संस्थान की स्थापना की पहल की, जो पक्षीविज्ञान और प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में विशेषज्ञता और ज्ञान के विकास जैसे चुनौतीपूर्ण कार्यों को आगे बढ़ा सके। हालांकि, उनका यह महान स्वप्न उनके जीवनकाल में साकार नहीं हो सका। बाद में भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (तत्कालीन पर्यावरण एवं वन मंत्रालय—तथा बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी जिससे सलीम अली जीवनभर जुड़े रहे), ने मिलकर उनके इस स्वप्न को साकार करने के प्रयास आगे बढ़ाए।

सैकोन में पक्षी 1
स्रोत: मंदार चौककर
सैकोन में पक्षी 2

इन निरंतर प्रयासों का फल वर्ष 1990 में मिला, जब पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालयके अंतर्गत पक्षीविज्ञान और प्राकृतिक इतिहास के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए एक उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की गई। इस केंद्र का नाम डॉ. सलीम अली की स्मृति में“सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री (सैकॉन)”रखा गया। केंद्र की स्थापना की जिम्मेदारी बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटीको सौंपी गई। यह निर्णय लिया गया कि केंद्र की स्थापना प्रायद्वीपीय भारत में की जाए और पश्चिमी घाट के जैव-विविधता-समृद्ध क्षेत्रों के सापेक्ष रणनीतिक स्थिति को देखते हुए कोयंबटूर को इसका “मुख्यालय” चुना गया।

सैकॉन ने वर्ष 1991 में कोयंबटूर शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर, सिरुवानी रोड स्थित कलमपलायम में एक किराये की इमारत से अपने कार्यों की शुरुआत की।