भारत में एशियाई हाथी को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में सूचीबद्ध किया गया है तथा इसेराष्ट्रीय धरोहर प्रतीकका दर्जा भी प्रदान किया गया है। विश्व की कुल एशियाई हाथी आबादी का अनुमानित लगभग 60 प्रतिशत भारत में पाया जाता है।

इनमें से अधिकांश हाथी 30 हाथी आरक्षित क्षेत्रों में फैले हुए हैं, जो चार विशिष्ट क्षेत्रों में स्थित 11 हाथी परिदृश्यों को सम्मिलित करते हैं—

  • उत्तर-पूर्वी क्षेत्र
  • पूर्व-मध्य क्षेत्र
  • उत्तरी क्षेत्र
  • दक्षिणी क्षेत्र

ये 23 राज्यों में विस्तृत हैं तथा वर्ष 2017 तक कम से कम 101 गलियारों के माध्यम से आपस में क्षेत्रीय रूप से जुड़े हुए हैं। देशभर में मानव बस्तियों और कृषि क्षेत्रों के विस्तार के परिणामस्वरूप हाथियों के आवास का व्यापक नुकसान हुआ है, चारे की गुणवत्ता में गिरावट आई है, परिदृश्य संपर्क में कमी आई है तथा ऐतिहासिक काल की तुलना में हाथियों की आबादी और उनके कुल वितरण क्षेत्र में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है।

जैसे-जैसे उनके आवास सिमटते जा रहे हैं, हाथी धीरे-धीरे मनुष्यों के अधिक निकट संपर्क में आने को विवश हो रहे हैं, जिससे स्थान और संसाधनों को लेकर संघर्ष की घटनाएँ अधिक बार और अधिक गंभीर रूप में सामने आ रही हैं। इसके परिणाम फसल नष्ट होने से लेकर मानव एवं हाथी दोनों की मृत्यु तक हो सकते हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए लक्षित, बहुविषयक अनुसंधान की आवश्यकता है, जो संरक्षण एवं प्रबंधन कार्यवाहियों तथा नीतिगत निर्णयों के लिए प्रभावी पैरवी में परिवर्तित हो सके।

भारत सरकार ने वर्ष 1991-92 मेंपर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत एक केंद्रीय प्रायोजित योजना के रूप में ”परियोजना हाथी“ की शुरुआत की। इसका उद्देश्य भारत के हाथी क्षेत्र वाले राज्यों को हाथियों, उनके आवासों एवं गलियारों के संरक्षण हेतु वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्रदान करना तथा मानव-हाथी संघर्ष की समस्या का समाधान करना था। साथ ही, इस परियोजना का लक्ष्य कैद में रखे गए हाथियों के कल्याण को बढ़ावा देना भी था।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नेवन्यजीव संस्थान भारत, देहरादूनमेंहाथी प्रकोष्ठकी स्थापना परियोजना हाथी प्रभाग की एक तकनीकी इकाई के रूप में की है, ताकि जंगली अवस्था एवं कैद—दोनों स्थितियों में हाथियों के संरक्षण प्रयासों को सुदृढ़ करने हेतु मंत्रालय को तकनीकी परामर्श उपलब्ध कराया जा सके। यह प्रकोष्ठ भारत के हाथी आरक्षित क्षेत्रों में कार्यरत संरक्षित क्षेत्र प्रबंधकों एवं अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के लिए क्षेत्र-आधारित प्रशिक्षण भी प्रदान करता है तथा हाथी आवासों, आबादी एवं उनसे संबंधित अन्य मुद्दों के प्रबंधन हेतु उनकी क्षमताओं का विकास करता है।

दृष्टि एवं उद्देश्य

हाथी प्रकोष्ठनिम्नलिखित आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु कार्य करता है—

  • प्रबंधकों एवं अग्रिम पंक्ति के कार्मिकों के लिए समावेशी, क्षेत्र-आधारित प्रशिक्षण तथा क्षमता निर्माण।
  • देश में हाथियों की अवैध एवं छिटपुट पकड़ तथा व्यापार पर नियंत्रण हेतु कैद हाथियों के डाटाबेस का एक केंद्रीय भंडार विकसित करना।
  • पूरे भारत में हाथी आरक्षित क्षेत्रों के लिए डाटाबेस का निर्माण।
  • अखिल भारतीय एटलस हेतु मानव–हाथी संघर्ष से संबंधित आंकड़ों का संकलन एवं निर्माण।
  • जंगली हाथी आबादी पर केंद्रित अनुसंधान एवं निगरानी परियोजनाओं का संचालन, ताकि हाथियों एवं उनके आवासों के एकीकृत संरक्षण एवं प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा सके।