वन्यजीव एवं संरक्षित क्षेत्रों के लिए ईआईएसीपी कार्यक्रम केंद्र

कार्यक्रम केंद्र अपने निर्धारित विषय क्षेत्र से संबंधित समस्त सूचनाओं, प्रकाशनों एवं अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों का भंडार (रिपॉजिटरी) है। यह डाटाबेस का संधारण करता है तथा वर्ष भर विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों का आयोजन करता है, जिनमें मिशन एल आई एफ ईऔर एस ए पी के अंतर्गत जन-जागरूकता अभियानों और कार्यक्रमों का आयोजन शामिल है। साथ ही, यह जी एस डी पीपाठ्यक्रमों, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों एवं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा निर्देशित अन्य अनिवार्य गतिविधियों का संचालन करता है।

पर्यावरण सूचना, जागरूकता, क्षमता निर्माण एवं आजीविका कार्यक्रम (ईआईएसीपी) का दृष्टिकोण निम्नलिखित है :

  • वन्यजीव विज्ञान से संबंधित जानकारी का प्रसार करना तथा वन्यजीव संरक्षण एवं संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन से संबंधित शीर्ष स्तर पर निर्णय लेने हेतु आवश्यक सूचनाएँ उपलब्ध कराना।
  • नीति-निर्माताओं से लेकर शोधकर्ताओं, उद्योगों तथा आम नागरिकों तक—राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर—विविध हितधारकों को पर्यावरणीय आँकड़ों एवं सूचनाओं की व्यापक श्रृंखला तक देशव्यापी वेब-सक्षम नेटवर्क के माध्यम से सहयोग एवं सुविधा प्रदान करना।
  • देश के पर्यावरण से संबंधित चिन्हित विषय क्षेत्रों, स्थानीय परिस्थितियों एवं मुद्दों के अंतर्गत एक समग्र पर्यावरणीय सूचना डाटाबेस उपलब्ध कराना।
  • स्वच्छता कार्य योजना (एस ए पी)के माध्यम से—जो एक अंतर-मंत्रालयी पहल है—एकल-उपयोग प्लास्टिक पर रोक जैसे तात्कालिक/महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दों पर जागरूकता को बढ़ावा देना।
  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा परिकल्पित मिशन एल आई एफ ई(पर्यावरण के लिए जीवनशैली) में सक्रिय रूप से सहभागिता करना।
  • ग्रीन स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम (जी एस डी पी) के माध्यम से युवाओं में कौशल विकास एवं रोजगार सृजन को बढ़ावा देते हुए पारिस्थितिकी तंत्र एवं जैव विविधता के संरक्षण हेतु एक प्रभावी साधन विकसित करना।
  • सतत विकास के लिए तकनीकी ज्ञान एवं प्रतिबद्धता से युक्त हरित-कुशल युवाओं का विकास करना, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र एवं जैव विविधता के संरक्षण में सहायता मिले; साथ ही पारंपरिक ज्ञान एवं शिल्प पर आधारित आजीविकाओं के माध्यम से, विशेषकर पूर्वोत्तर क्षेत्र की जनजातीय आबादी की सतत आजीविका को सहयोग प्रदान करना।
  • हरित-कुशल युवाओं के सहयोग से वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों/चिड़ियाघरों के स्वास्थ्य एवं लचीलापन का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन करना।
  • जैव विविधता के पारिस्थितिकीय रूप से सतत उपयोग को सुनिश्चित करना, जिससे भारत की वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों को लाभ प्राप्त हो।

डब्ल्यूआईआई–ईआईएसीपी कार्यक्रम केंद्र टीम

  • डॉ. गोबिंद सागर भारद्वाज,
    भारतीय वन सेवा — निदेशक एवं कार्यक्रम प्रमुख

  • डॉ. के. रमेश,
    वैज्ञानिक–एफ एवं डब्ल्यूआईआई–ईआईएसीपी समन्वयक

  • डॉ. सी. रमेश,
    वैज्ञानिक–ई एवं डब्ल्यूआईआई–ईआईएसीपी सह-समन्वयक

  • श्री आमिर मोही उद दीन लोन
    कार्यक्रम अधिकारी

  • श्री अयान दत्ता
    सूचना अधिकारी

  • सुश्री तृप्ति घोष
    सूचना प्रौद्योगिकी अधिकारी