पाठ्यक्रम पृष्ठभूमि
संरक्षित क्षेत्रों की स्थापना एवं प्रबंधन के माध्यम से जैविक विविधता का संरक्षण वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है। साथ ही यह भी आवश्यक है कि ऐसे संरक्षित क्षेत्रों का प्रबंधन उस परिदृश्य समुच्चय के एक घटक के रूप में किया जाए, जिसमें वे स्थित हैं। अतः संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क के प्रबंधन के लिए ऐसे कार्मिकों की आवश्यकता होती है जिनके पास वन्य क्षेत्र के प्रबंधन के साथ-साथ उस पर प्रभाव डालने वाले सभी बाह्य कारकों को समझने एवं संभालने का उपयुक्त ज्ञान और कौशल हो।
संरक्षित क्षेत्र प्रणाली के प्रबंधन हेतु आवश्यक क्षमताओं वाले पेशेवरों का एक समूह विकसित करने के उद्देश्य से वर्ष 1977 में वन्यजीव प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया। अब तक ऐसे 45 पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण किए जा चुके हैं। 10 माह की अवधि वाला 46वाँ पाठ्यक्रम 01 सितंबर 2025से प्रारंभ होगा। इस कार्यक्रम में कुल प्रवेश क्षमता 20 प्रतिभागियों की है।
योग्यता
यह पाठ्यक्रम सेवारत भारतीय वन सेवा तथा राज्य वन सेवा के उप वन संरक्षक / सहायक वन संरक्षक स्तर के अधिकारियों, पशु चिकित्सा अधिकारियों तथा समकक्ष पदों पर कार्यरत कार्मिकों के लिए है। अभ्यर्थियों के पास वानिकी प्रशिक्षण की पृष्ठभूमि के साथ किसी भी विज्ञान विषय में न्यूनतमस्नातक डिग्री होना अनिवार्य है।