भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून स्थित लैंडस्केप इकोलॉजी एवं विज़ुअलाइज़ेशन प्रयोगशाला एक विशिष्ट अनुसंधान एवं प्रशिक्षण सुविधा है, जो वन्यजीव संरक्षण एवं पर्यावरण प्रबंधन के लिए उन्नत भू-स्थानिक उपकरणों तथा परिदृश्य-स्तरीय विश्लेषण के अनुप्रयोग को समर्पित है। यह प्रयोगशाला भारत के विविध पारिस्थितिकी तंत्रों में स्थानिक प्रतिरूपों, पारिस्थितिक प्रक्रियाओं तथा मानवजनित प्रभावों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, तथा साक्ष्य-आधारित संरक्षण योजना और निर्णय-निर्माण को बढ़ावा देने पर विशेष बल देती है।
उद्देश्य एवं कार्यक्षेत्र
यह प्रयोगशाला बहुविषयक दृष्टिकोण के साथ कार्य करती है, जिसमें परिदृश्य पारिस्थितिकी, भौगोलिक सूचना प्रणाली, सुदूर संवेदन, स्थानिक मॉडलिंग तथा आँकड़ा दृश्यांकन का एकीकरण किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे सुदृढ़ स्थानिक ढाँचे विकसित करना है, जो संरक्षण रणनीतियों, आवासीय संपर्कता, पारिस्थितिक निगरानी तथा जैव विविधता के बहु-स्तरीय आकलन में सहायक हों।
मुख्य कार्य
- परिदृश्य-स्तरीय विश्लेषण: प्रयोगशाला व्यापक स्तर पर स्थानिक अध्ययनों का संचालन करती है, जिनके माध्यम से भूमि उपयोग/भूमि आवरण में परिवर्तन, आवास विखंडन, गलियारों की व्यवहार्यता तथा महत्वपूर्ण वन्यजीव आवासों—जैसे बाघ अभयारण्यों, हाथी गलियारों एवं जैव विविधता हॉटस्पॉट्स—में संपर्कता का आकलन किया जाता है।
- अनुसंधान एवं प्रबंधन हेतु भू-स्थानिक सहयोग: यह प्रयोगशाला भारतीय वन्यजीव संस्थान में संचालित विभिन्न शोध परियोजनाओं के लिए मानचित्रण एवं स्थानिक विश्लेषण संबंधी तकनीकी सहयोग प्रदान करती है। इसमें वन्यजीव गलियारों का निर्धारण, संरक्षण प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान तथा मानव–वन्यजीव अंतःक्रिया संबंधी अध्ययन शामिल हैं।
- पारिस्थितिक मॉडलिंग: मैक्सएंट, सर्किटस्केप एवं ज़ोनेशन जैसे उन्नत मॉडलिंग उपकरणों का उपयोग कर प्रयोगशाला प्रजातियों के वितरण, आवास उपयुक्तता तथा आवागमन गलियारों का मॉडल तैयार करती है, जिससे संरक्षण नीतियों एवं कार्यों को दिशा मिलती है।
- दृश्यांकन एवं निर्णय-सहायक प्रणालियाँ: यह प्रयोगशाला जटिल स्थानिक आँकड़ों को प्रभावी दृश्य रूपों में परिवर्तित करने में भी विशेषज्ञता रखती है, जिससे बेहतर संप्रेषण, हितधारक सहभागिता एवं निर्णय-निर्माण संभव हो सके। इसमें गतिशील मानचित्र, परिदृश्य-आधारित मॉडलिंग तथा त्रि-आयामी परिदृश्य दृश्यांकन शामिल हैं।
- क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण: प्रयोगशाला संरक्षण योजना में भौगोलिक सूचना प्रणाली, सुदूर संवेदन एवं पारिस्थितिक मॉडलिंग के उपयोग पर वन प्रबंधकों, शोधकर्ताओं एवं छात्रों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती है। यह प्रयोगशाला व्यावहारिक अधिगम एवं अंतर्विषयक सहयोग का एक प्रमुख केंद्र है।
अवसंरचना एवं उपकरण
लैंडस्केप इकोलॉजी एवं विज़ुअलाइज़ेशन प्रयोगशाला उच्च-स्तरीय कंप्यूटिंग प्रणालियों, उन्नत भौगोलिक सूचना प्रणाली एवं सुदूर संवेदन सॉफ़्टवेयर (आर्कजीआईएस, क्यूजीआईएस, एर्डास इमैजिन, गूगल अर्थ इंजन) तथा स्थानिक सांख्यिकी, मॉडलिंग एवं आँकड़ा दृश्यांकन हेतु उपकरणों से सुसज्जित है। सूक्ष्म-स्तरीय पारिस्थितिक आकलनों के लिए प्रयोगशाला ड्रोन चित्रों, लिडार आँकड़ा-समुच्चयों तथा उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह आँकड़ों का भी उपयोग करती है।
प्रमुख योगदान
लैंडस्केप इकोलॉजी एवं विज़ुअलाइज़ेशन प्रयोगशाला ने कई राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण परियोजनाओं में योगदान दिया है, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं—
- अखिल भारतीय बाघ निगरानी कार्यक्रम के अंतर्गत वन्यजीव गलियारों का मानचित्रण एवं मॉडलिंग
- राष्ट्रीय जैव विविधता कार्य योजना हेतु स्थानिक प्राथमिकता निर्धारण
- हिम तेंदुआ, हाथी तथा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण आवासों की पहचान
- पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र निर्धारण प्रक्रिया में तकनीकी सहयोग
- जलवायु परिवर्तन परिदृश्यों के अंतर्गत परिदृश्य-स्तरीय संरक्षण के लिए संपर्कता मॉडल का विकास