परियोजना के बारे में
“संस्थानों में परिवर्तन हेतु लैंगिक उन्नति” एक अभिनव पायलट परियोजना है, जिसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वाइज-किरण प्रभाग द्वारा प्रारम्भ किया गया है। यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करने के लिए एक नवीन हस्तक्षेप कार्यक्रम है। इस परियोजना की घोषणा 28 फरवरी 2020 को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर भारत के माननीय राष्ट्रपति द्वारा विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित “विज्ञान में महिलाएँ” विषयक समारोह में की गई थी।

इस परियोजना का उद्देश्य उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थानों को विविधता, समावेशन तथा प्रतिभा के समग्र विकास को समर्थन देने के लिए प्रेरित करना है, जिससे उनकी सफलता और प्रगति सुनिश्चित हो सके। विशेष रूप से, इसका उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी, चिकित्सा एवं गणित विषयों में सभी स्तरों पर महिलाओं की समान भागीदारी के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना तथा गहराई से जड़ जमाई समस्याओं का समाधान करना है। यह केवल महिलाओं की भर्ती और उनकी संस्थागत निरंतरता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके सम्पूर्ण व्यावसायिक जीवन में प्रगति सुनिश्चित करने के लिए नई दृष्टि प्रस्तुत करती है।
यह व्यापक कार्यक्रम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा ब्रिटिश परिषद के सहयोग से संचालित किया जा रहा है, ताकि शिक्षा के क्षेत्र में भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच विद्यमान गहरे संबंधों को और सुदृढ़ किया जा सके। इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह केवल प्रमाणन और पुरस्कारों के माध्यम से संस्थानों का मूल्यांकन, प्रत्यायन और सम्मान ही नहीं करेगी, बल्कि संस्थानों को लैंगिक समानता की वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं तक पहुँचने के लिए सहभागिता, मार्गदर्शन, साझेदारी और सहयोग भी प्रदान करेगी। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु ब्रिटिश परिषद, उन्नत उच्च शिक्षा संस्थानों तथा यूनाइटेड किंगडम के मान्यता प्राप्त संस्थानों के सहयोगी नेटवर्क के साथ समन्वय स्थापित करने में सहायता प्रदान करेगी।
सहभागी यूनाइटेड किंगडम के संस्थान निम्नलिखित हैं :
- लंदन विश्वविद्यालय महाविद्यालय
- क्वीन मैरी विश्वविद्यालय, लंदन
- मैनचेस्टर विश्वविद्यालय
- एस्टन विश्वविद्यालय, बर्मिंघम
- पश्चिमी स्कॉटलैंड विश्वविद्यालय
- किंग्स कॉलेज, लंदन
गति पायलट परियोजना में भारतीय वन्यजीव संस्थान
उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान से जुड़े विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों को गति परियोजना में भागीदारी हेतु रुचि अभिव्यक्ति के लिए खुला आमंत्रण दिया गया था। प्राप्त आँकड़ों के गहन विश्लेषण तथा निर्धारित चयन प्रक्रिया के उपरांत, गति पायलट परियोजना में भाग लेने के लिए 30 संस्थानों का चयन किया गया।
भारतीय वन्यजीव संस्थान उन 30 संस्थानों में से एक है, जिन्हें भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा गतिपायलट परियोजना में भागीदारी हेतु चयनित किया गया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान गति चार्टर का हस्ताक्षरकर्ता बन गया है तथा इस प्रकार संस्थान की नीतियों, कार्यप्रणालियों, कार्ययोजनाओं एवं संस्थागत संस्कृति में परिवर्तनकारी बदलाव लाने हेतु इसके मार्गदर्शक सिद्धांतों को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान को पश्चिमी स्कॉटलैंड विश्वविद्यालय के साथ समूहबद्ध किया गया है।
सहयोगी संस्थाएँ
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार
कार्यान्वयन संस्था के रूप में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा निम्नलिखित का गठन किया गया है :
- गति पायलट परियोजना की निगरानी हेतु गति सलाहकार समिति।
- • परामर्श तथा गति के लिए लैंगिक समानता रूपरेखा एवं अन्य संबंधित मॉड्यूल के विकास की प्रक्रिया में सुझाव प्रदान करने हेतु गति कार्य समूह, जिसका प्रारूप राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की शैक्षणिक सलाहकार डॉ. प्रतिभा जॉली द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के परामर्श से तैयार किया गया।
ब्रिटिश परिषद
ब्रिटिश परिषद, अपने ज्ञान सहयोगी यूनाइटेड किंगडम स्थित “एडवांस एचई” के माध्यम से एथेना स्वान पहल से संबंधित अनुभव, प्रक्रियाएँ, विकास एवं रणनीतियाँ साझा करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा पायलट संस्थानों के साथ गति पायलट के संचालन में सहयोग प्रदान कर रही है।
कार्यशालाएँ एवं गतिविधियाँ
9 जून 2022 को भारतीय वन्यजीव संस्थान के सभागार में तत्काल चित्रांकन एवं पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई।
आयोजक : डब्ल्यूआईआई-गति
सहयोगी संस्थाएँ : एनविस एवं डब्ल्यूआईआई-एनएमसीजी
इस प्रतियोगिता का आयोजन युवा मनों को महिलाओं के महत्व तथा आज के समाज में उनके योगदान के प्रति संवेदनशील बनाने हेतु किया गया, जिसमें विशेष रूप से लैंगिक समानता के महत्व पर बल दिया गया।
स्थल पर आयोजित चित्रकला एवं पेंटिंग प्रतियोगिता का विषय ‘अपनी महिला आदर्श व्यक्तित्व का चित्र बनाइए’ था, जिसमें विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में कुल 31 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ सुश्री ऋतु चौहान, परियोजना सहायक, डब्ल्यूआईआई-गति द्वारा स्वागत भाषण के साथ हुआ। उपस्थित जनों को गति परियोजना के उद्देश्यों एवं लक्ष्यों का संक्षिप्त परिचय दिया गया, जिसके पश्चात परियोजना पर आधारित एक लघु वीडियो प्रदर्शित किया गया। डॉ. संगीता आंगोम, परियोजना वैज्ञानिक, डब्ल्यूआईआई-एनएमसीजी ने प्रतिभागियों को प्रतियोगिता के नियमों की जानकारी दी तथा उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया।
प्रतिभागियों को ‘अपनी महिला आदर्श व्यक्तित्व का चित्र बनाइए’ विषय पर चित्र एवं पेंटिंग बनाने हेतु एक घंटे का समय दिया गया। यह अत्यंत आकर्षक था कि युवा प्रतिभाओं ने विश्व इतिहास रचने वाली महिला नेताओं एवं प्रभावशाली व्यक्तित्वों के चित्र उकेरे। प्रतिभागियों को पुरस्कार डॉ. रुचि बडोला द्वारा प्रदान किए गए। कुल 31 प्रतिभागियों में से विभिन्न श्रेणियों में शीर्ष 3 प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया तथा विशेष उल्लेख श्रेणी के अंतर्गत कुल 11 प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। श्री आमिर लोन, जीआईएस विशेषज्ञ, एनविस ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया तथा विजेताओं को बधाई दी। गति, एनविस एवं डब्ल्यूआईआई-एनएमसीजी परियोजना के संयुक्त प्रयासों से यह कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा।
20 मई 2022 को जीसैट अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
“संस्थानों में परिवर्तन हेतु लैंगिक उन्नति” परियोजना के अंतर्गत एक गति स्व-मूल्यांकन दल का गठन किया गया है।
जीसैट दल की भूमिका निम्नलिखित है
- गति पायलट परियोजना के संबंध में जानकारी प्रसारित करने हेतु व्यापक प्रचार अभियान एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम प्रारम्भ करना।
- जागरूकता उत्पन्न करने के लिए संगोष्ठियों, कार्यशालाओं तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना।
- विभिन्न हितधारकों एवं समुदाय के सदस्यों के साथ व्यापक स्तर पर चर्चा एवं परामर्श करना।
- व्यक्तिगत एवं समूह चर्चाओं, विषय-आधारित प्रतिपुष्टि प्रपत्रों एवं सर्वेक्षणों, संवाद सत्रों तथा टाउनहॉल बैठकों आदि में सहभागिता करना।
- स्मार्ट कार्ययोजनाओं के कार्यान्वयन हेतु प्रस्ताव विकसित करना एवं योजना तैयार करना।
- स्व-मूल्यांकन आवेदन की पूर्णता में सहयोग प्रदान करना।
- सहकर्मी समीक्षा से प्राप्त सुझावों का समावेशन करना।
- I20 मई 2022 को जीसैट अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय वन्यजीव संस्थान की वैज्ञानिक ‘जी’ तथा गति परियोजना की नोडल अधिकारी डॉ. रुचि बडोला ने भारतीय वन्यजीव संस्थान के जीसैट दल को परियोजना का विस्तृत परिचय दिया। डॉ. बडोला ने भारतीय वन्यजीव संस्थान समुदाय के लिए इस परियोजना की विशिष्टता एवं महत्त्व तथा संस्थान में गति चार्टर के समग्र एकीकरण हेतु संस्थागत वातावरण निर्माण में जीसैट की भूमिका को विस्तार से स्पष्ट किया।
पश्चिमी स्कॉटलैंड विश्वविद्यालय के साथ ऑनलाइन कार्यशाला श्रृंखला
तिथि : दिसंबर से मार्च तक 8 कार्यशालाएँ
आयोजक : पश्चिमी स्कॉटलैंड विश्वविद्यालय
पश्चिमी स्कॉटलैंड विश्वविद्यालय, यूनाइटेड किंगडम के सफल “एथेना स्वान” मॉडल से प्राप्त अपने अनुभव एवं विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए गति प्रत्यायन हेतु भारतीय संस्थानों को मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करताहै।यहकार्यकार्यशालाओंकीश्रृंखला, संसाधनों एवं अध्ययन-सामग्रियों के साझा करने, सर्वोत्तम प्रथाओं पर परामर्श देने तथा संस्थानों के मध्य सहयोग को प्रोत्साहित करने के माध्यम से किया जाता है।
पश्चिमी स्कॉटलैंड विश्वविद्यालय के साथ आयोजित कार्यशालाओं में भारतीय वन्यजीव संस्थान की वैज्ञानिक ‘जी’ एवं गति परियोजना की नोडल अधिकारी डॉ. रुचि बडोला तथा गति परियोजना की परियोजना सहायक सुश्री ऋतु चौहान ने सहभागिता की। इन कार्यशालाओं ने भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों एवं अनुसंधान संगठनों को प्रतिभा उन्नयन हेतु विविधता एवं समावेशन को समर्थन देने के साथ-साथ विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी, चिकित्सा एवं गणित विषयों में सभी स्तरों पर महिलाओं की भागीदारी में आने वाली प्रणालीगत बाधाओं के समाधान में सहायता प्रदान की। इसका उद्देश्य भर्ती एवं निरंतरता में सुधार करना तथा महिलाओं को उनके व्यावसायिक विकास में सहयोग प्रदान करना भी है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान को पश्चिमी स्कॉटलैंड विश्वविद्यालय के अंतर्गत अन्य भारतीय संस्थानों — बिरला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान, पिलानी; राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, राउरकेला; बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय; तथा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की रक्षा जैव अभियांत्रिकी एवं विद्युत-चिकित्सा प्रयोगशाला — के साथ समूहबद्ध किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस वर्चुअल व्याख्यान श्रृंखला “वह नदी : नए कल का निर्माण करती हुई” (2 मार्च 2022 से 7 मार्च 2022 तक)
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सप्ताह का आयोजन वर्ष की थीम “आजकीलैंगिकसमानता, सतत् कल के लिए”कोध्यान में रखते हुए किया गया। इसका उद्देश्य महिलाओं को अपनी राय व्यक्त करने तथा जलवायु परिवर्तन एवं सततता से संबंधित निर्णय-निर्माण प्रक्रियाओं में भागीदारी के लिए सशक्त बनाना था, जो सतत विकास और व्यापक लैंगिक समानता के लिए अत्यंत आवश्यक तत्व है।
2 मार्च से 7 मार्च 2022 तक “वह नदी :न एकल का निर्माण करती हुई” विषय के अंतर्गत वर्चुअल व्याख्यानों की श्रृंखला आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी छह महिला वक्ताओं ने प्रतिभागियों के साथ संवाद किया तथा विविध विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। प्रत्येक व्याख्यान में देश के विभिन्न क्षेत्रों एवं जीवन के विविध क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागियों ने भाग लिया। छह दिनों तक चली इस वर्चुअल व्याख्यान श्रृंखला में कुल 100 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
प्रथम दिवस : 2 मार्च 2022
डॉ. रुचि बडोला — “नदी और लोगों का संबंध”
श्रृंखला का प्रथम व्याख्यान डॉ. रुचि बडोला, वैज्ञानिक ‘जी’ एवं भारतीय वन्यजीव संस्थान–राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन परियोजना की नोडल अधिकारी द्वारा दिया गया। अपने व्याख्यान में उन्होंने नदियों के सांस्कृतिक महत्त्व तथा संस्कृति एवं पौराणिक कथाओं में नदियों को महिलाओं के रूप में पूजनीय एवं जीवनदायिनी मानने की परंपरा पर प्रकाश डाला।
उन्होंने नदी संरक्षण में महिलाओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर विशेष बल दिया तथा गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण एवं स्वच्छता के लिए कार्यरत महिला गंगा प्रहरियों के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रेरित एवं दृढ़निश्चयी महिलाएँ न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता प्राप्त कर सकती हैं, बल्कि सामाजिक आंदोलनों की दिशा भी बदल सकती हैं।

द्वितीय दिवस : 3 मार्च 2022
सुश्री श्रुति शर्मा — “चंबल के अनेक जीवन”
द्वितीय व्याख्यान राजस्थान सरकार की प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (सेवानिवृत्त) सुश्री श्रुति शर्मा द्वारा दिया गया। उन्होंने चंबल नदी के पारिस्थितिकीय, आर्थिक एवं सामाजिक योगदान पर विस्तार से चर्चा की।
सुश्री शर्मा ने एक महिला अधिकारी के रूप में पुरुष-प्रधान राज्य एवं समाज में संरक्षण संबंधी मुद्दों पर कार्य करने के अपने अनुभव भी प्रतिभागियों के साथ साझा किए।
तृतीय दिवस : 4 मार्च 2022
सुश्री गीता गैरोला — ' बोल के लब आजाद हैं तेरे '
गंगा अवलोकन, चंडी घाट, हरिद्वार में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
“वह नदी : नए कल का निर्माण करती हुई” विषयक कार्यक्रम का शुभारम्भ डॉ. रुचिबडोला, वैज्ञानिक ‘जी’ एवं गति की नोडल अधिकारी के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस/सप्ताह के अवसर पर महिलाओं को शुभकामनाएँ दीं तथा इस बात पर विशेष बल दिया कि विभिन्न क्षेत्रों से आई महिलाओं का एक सशक्त भविष्य के निर्माण हेतु एकजुट होना महिला दिवस का वास्तविक उत्सव है।
इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रदर्शन ई-मैच द्वारा पवित्र गंगा नदी की पौराणिक महत्ता तथा हमारे जीवन में उसके महत्त्व पर आधारित था। कार्यक्रम का नेतृत्व ई-मैच के अध्यक्ष श्री आशीष कुमार झा ने किया। इसमें एक नृत्य प्रस्तुति भी शामिल थी, जिसका उद्देश्य गंगा नदी की स्वच्छता के महत्त्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था। प्रेरणा एवं आत्मविश्वास से परिपूर्ण महिला गंगा प्रहरियों ने आध्यात्मिक गीतों एवं संगीत के माध्यम से लोगों को गंगा पुनर्जीवन के लिए एकजुट किया।
तृतीय वक्ता के रूप में उत्तराखंड महिला समाख्या की पूर्व निदेशक सुश्री गीता गैरोला ने महिलाओं से जुड़े लैंगिक समानता के मुद्दों पर कार्य करने के अपने व्यापक अनुभव साझा किए। उन्होंने समाज में महिलाओं द्वारा विभिन्न स्तरों पर सामना की जाने वाली समस्याओं को रेखांकित किया। उन्होंने पुरुष प्रतिभागियों से भी अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार समानता को समर्थन एवं प्रोत्साहन देने का आग्रह किया। साथ ही, प्रतिभागियों को प्रत्येक संभव मंच पर अपनी आवाज़ उठाने तथा समान एवं न्यायपूर्ण समाज के निर्माण की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

चतुर्थ दिवस : 5 मार्च 2022
डॉ. किरण नेगी — ' महिलाओं के बढ़ते कदम:तकनीकी से स्वावलंबन के ओर '
चतुर्थ दिवस की वक्ता हिमालयी पर्यावरण अध्ययन एवं संरक्षण संगठन की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. किरण नेगी थीं। डॉ. नेगी ने ग्रामीण महिलाओं के सतत आजीविका विकास तथा ग्रामीण महिलाओं द्वारा तकनीकों के उपयोग के संबंध में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने देश के विभिन्न भागों में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा प्राप्त आर्थिक आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक कहानियाँ भी प्रस्तुत कीं।
उन्होंने प्रतिभागियों को तकनीकी एवं आर्थिक विकास के प्रति शिक्षित और जागरूक बनने तथा सामाजिक एवं आर्थिक रूप से अधिक सशक्त एवं सुरक्षित बनने के लिए प्रेरित किया।

पंचम दिवस : 6 मार्च 2022
डॉ. हर्षा लखेड़ा — 'शिक्षा शक्ति एवं सामर्थ्य: महिलाओं की विरासत '
पंचम दिवस की वक्ता शिक्षिका एवं शैक्षणिक परामर्शदाता डॉ. हर्षा लखेड़ा थीं। उन्होंने शहरी एवं ग्रामीण महिलाओं द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं के अंतर पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने शिक्षा में लैंगिक समानता के महत्त्व तथा महिलाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने और उन्हें उच्चतम स्तर की शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम बनाने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर विशेष बल दिया।
षष्ठ दिवस : 7 मार्च 2022
सुश्री मरियम हैदर — “महिलाएँ अपनी कहानियों की स्वयं कथाकार बनती हुई”
षष्ठ दिवस पर लेखिका, शोधकर्ता एवं स्पोकन वर्ड कलाकार सुश्री मरियम हैदर ने प्रतिभागियों के साथ संवाद किया। सुश्री हैदर ने समाज में परिवर्तन लाने हेतु अपनी बात को मुखर रूप से रखने के महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को यह भी बताया कि कहानी साझा करना अथवा कथावाचन एक ऐसा कौशल है, जिसे सीखा और विकसित किया जा सकता है, जो लोगों को समाधान खोजने के साथ-साथ स्वयं समाधान का माध्यम बनने में सक्षम बनाता है।
उन्होंने प्रतिभागियों से प्रत्येक संभव मंच एवं अवसर पर अपनी कहानियाँ और विचार साझा करने का आग्रह किया। उन्होंने विशेष रूप से आधुनिक प्रौद्योगिकी, विशेषकर सामाजिक मीडिया की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया, जो अपनी पहचान स्थापित करने और अपनी बात व्यापक स्तर तक पहुँचाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है।

विज्ञान में महिलाओं एवं बालिकाओं के अंतरराष्ट्रीय दिवस पर वर्चुअल व्याख्यान श्रृंखला 'समानता, विविधता और समावेशन: महिला सशक्तिकरण के तीन स्तंभ' (11 फरवरी 2022)
दिसंबर 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा 11 फरवरी को “विज्ञान में महिलाओं एवं बालिकाओं का अंतरराष्ट्रीय दिवस”के रूप में मनाने का प्रस्ताव स्वीकार किया गया। इस अवसर पर आयोजित वर्चुअल व्याख्यान का उद्देश्य विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं एवं बालिकाओं की भूमिका को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में भी मान्यता देना था।
इस अवसर पर आयोजित वर्चुअल व्याख्यान में हिमाचल प्रदेश की प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (सेवानिवृत्त) डॉ. सविता ने अपने अनुभव साझा किए तथा संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं, कर्मचारियों एवं अन्य प्रतिभागियों के साथ महिला सशक्तिकरण के महत्त्व पर संवाद किया। उन्होंने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान से संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्यों को साझा किया तथा जल संसाधनों में कमी और उसके महिलाओं पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के दौरान लैंगिक समानता एवं कन्या भ्रूण हत्या जैसे सामाजिक मुद्दों पर आधारित लघु फिल्म “मुस्कान”काप्रदर्शनभीकियागया, जिससे प्रतिभागियों को इस सामाजिक कुरीति के प्रति जागरूक किया जा सके। इस ऑनलाइन वर्चुअल व्याख्यान में कुल 163 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

टीम परिचय
वैज्ञानिक – ‘जी’
गति परियोजना की नोडल अधिकारी
ruchi [at] wii [dot] gov [dot] in
परियोजना सहायक – गति परियोजना
ritugati [at] wii [dot] gov [dot] in